शामली। भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, नई दिल्ली के निर्देशों और जिलाधिकारी शामली के आदेशों के अनुपालन में 21 जनवरी, 2026 को गुलज़ारी वाला मंदिर, कैराना रोड, शामली में बाल विवाह मुक्त समाज की दिशा में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला प्रोबेशन अधिकारी श्री मौहम्मद मुशफेकीन ने की।
कार्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न धार्मिक नेताओं, श्रद्धालु समुदायों और विवाह संबंधी सेवा प्रदाताओं-जैसे मैरिज हॉल, बैंक्विट हॉल, बैंड/डीजे, फोटोग्राफर, टेंट हाउस-को बाल विवाह के दुष्परिणामों, कानूनी प्रावधानों और सरकारी योजनाओं के बारे में जागरूक करना था।
महिला कल्याण विभाग की सुश्री गजाला त्यागी और भारती ने बताया कि बाल विवाह वह होता है जिसमें लड़की की आयु 18 वर्ष से कम और लड़के की आयु 21 वर्ष से कम होने पर विवाह कर दिया जाता है, जो कि पूर्णतः गैरकानूनी है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह से बालिकाओं और बालकों के शारीरिक, मानसिक और शैक्षिक विकास पर गंभीर असर पड़ता है। कानूनन इस अपराध के लिए 2 वर्ष तक का कठोर कारावास और ₹1,00,000 तक का जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। इसके अलावा शादी में शामिल सभी व्यक्ति-बराती, फोटोग्राफर, मौलवी/पंडित, बैंड संचालक आदि-के खिलाफ FIR दर्ज की जा सकती है।
कार्यक्रम में जिला बाल विवाह निषेध अधिकारी की भूमिका पर भी जानकारी दी गई और आमजन से अपील की गई कि यदि किसी स्थान पर बाल विवाह होने की सूचना मिले तो पुलिस थाना, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, पुलिस आपातकालीन सेवा 112 या महिला हेल्पलाइन 181 पर तुरंत सूचना दें।
इस अवसर पर चाइल्ड हेल्पलाइन के शुभम शर्मा और डीसीपीयू के नीरज नारायण ने मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, निराश्रित महिला पेंशन योजना, स्पॉन्सरशिप योजना और मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना जैसी सरकारी योजनाओं की पात्रता और लाभों की जानकारी दी।
कार्यक्रम के अंत में धर्मगुरु शालेंद्र गिरी, ढोल वादक सुमित, एचटीयू SI रामेश्वर दयाल और अन्य उपस्थित लोगों ने बाल विवाह न करने और समाज में इसके खिलाफ जागरूकता फैलाने की शपथ ली।
