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संसाधन भरे थे हाथ, फिर युवराज की क्यों बची न जा सकी जान? नोएडा पुलिस के जवाब ने सवालों का अंबार लगा दियाग्रेटर नोएडा, 23 जनवरी 2026: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की पानी भरे गड्ढे में डूबने से हुई मौत ने न केवल परिवार को शोक में डुबो दिया, बल्कि पूरे इलाके में सिस्टम की लापरवाही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 16 जनवरी 2026 की घना कोहरा भरी रात को युवराज अपनी एसयूवी कार से घर लौट रहे थे, जब निर्माणाधीन साइट के पास एक गहरे गड्ढे में वाहन जा गिरा। लगभग दो घंटे तक कार की छत पर चढ़कर मदद मांगते रहे युवराज की गुहार ‘पापा, मुझे बचा लो’ परिवार के दिलों को चीर गई, लेकिन देरी से पहुंची या अप्रभावी बचाव टीमों के कारण उनकी जान चली गई। अब नोएडा पुलिस के स्पष्टीकरण ने सवालों को और गहरा कर दिया है—अगर हाथ खाली नहीं थे, तो युवराज का साथ क्यों न दे पाए?हादसे की दर्दनाक रात: क्या-क्या घटा?युवराज मेहता फ्लिपकार्ट में डिलीवरी एजेंट के रूप में काम करते थे और उस रात देर शाम ड्यूटी खत्म कर घर की ओर बढ़ रहे थे। घने कोहरे के कारण विजिबिलिटी नाममात्र की थी। अचानक उनकी एसयूवी एक निर्माणाधीन लोटस ग्रीन प्रोजेक्ट के पास खुले गड्ढे में धंस गई, जो पानी से भरा हुआ था। युवराज ने तुरंत पिता को फोन किया और अपनी हालत बताई। फोन की फ्लैशलाइट जलाकर वे करीब दो घंटे तक जिंदा रहे, लेकिन पानी का स्तर बढ़ता गया। हादसे के वायरल वीडियो में साफ दिखता है कि वे मदद के लिए हाथ-पांव मार रहे थे। कार को बाहर निकालने में पूरे चार दिन लग गए, जो बचाव की विफलता का जीता-जागता प्रमाण बन गया।पुलिस का दावा: संसाधन तो थे, कोहरा दुश्मन बनानोएडा पुलिस ने डायल 112 पर कॉल मिलते ही त्वरित कार्रवाई का दावा किया है। थाना नॉलेज पार्क क्षेत्र के अंतर्गत हुई इस घटना पर पीआरवी (पुलिस रिस्पॉन्स व्हीकल) न्यूनतम समय में पहुंच गई। इसके बाद स्थानीय पुलिस, फायर ब्रिगेड, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें भी मौके पर पहुंचीं। पुलिस के एक्स हैंडल पर पोस्ट की गई जानकारी के मुताबिक, रेस्क्यू के लिए लाइफ बाय रिंग, रबर बोट, हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म, सर्च लाइट, लाइफ-सेविंग रोप, एक्सटेंशन लैडर, हाइड्रा, ड्रैगन टॉर्च और रेस्क्यू फायर टेंडर जैसे आधुनिक उपकरण मौजूद थे। फिर भी, घने कोहरे और कम विजिबिलिटी ने रेस्क्यू को जटिल बना दिया। पुलिस का कहना है कि सभी संभव प्रयास किए गए, लेकिन परिस्थितियां विपरीत रहीं।सवालों का दौर: इतने संसाधनों के बावजूद असफलता क्यों?पुलिस के इस स्पष्टीकरण ने सवालों को कम करने के बजाय बढ़ा दिया है। वायरल वीडियो में रेस्क्यू टीम के जवान दिशा-निर्देश देते नजर आते हैं, लेकिन कोई भी पानी में उतरकर युवराज तक नहीं पहुंचा। उल्टा, एक फ्लिपकार्ट डिलीवरी एजेंट मोनिंदर सिंह ने खतरे का जोखिम उठाकर पानी में कूदकर कोशिश की, लेकिन अकेले वे क्या कर पाते? कुछ रिपोर्ट्स में आरोप लगा है कि मोनिंदर पर पुलिस का दबाव बनाकर बयान बदलवाए गए। सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं—अगर इतने उपकरण और टीमें थीं, तो युवराज को तुरंत क्यों न निकाला गया? क्या ट्रेनिंग की कमी थी या इच्छाशक्ति की? नोएडा जैसे ‘स्मार्ट सिटी’ में निर्माण साइटों पर बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेत और डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान का अभाव मौत का जाल बने हुए हैं। युवराज के पिता का दर्द भरा बयान है, “समय पर मदद मिल जाती तो मेरा बेटा आज जिंदा होता।”जांच तेज: गिरफ्तारियां और एनजीटी का हस्तक्षेपमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देश पर उच्च स्तरीय एसआईटी गठित की गई, जिसने घटनास्थल पर सीन रीक्रिएट कर तथ्यों की पड़ताल की। निर्माण कंपनी लोटस ग्रीन के दो बिल्डर—रवि बंसल और सचिन कर्णवाल—को सुरक्षा मानकों की अनदेखी के लिए गिरफ्तार कर लिया गया। नोएडा अथॉरिटी से डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान सहित विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है, जो 24 जनवरी को सरकार को सौंपी जाएगी। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कई अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। जांच में यह भी सामने आ रहा है कि गड्ढे पर कोई बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड नहीं था, जो सीधी लापरवाही का प्रमाण है।सोशल मीडिया पर उबाल: सिस्टम पर भड़का गुस्सायह हादसा महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता का प्रतीक बन चुका है। ट्विटर (एक्स) और फेसबुक पर #JusticeForYuvrajMehta ट्रेंड कर रहा है। लोग नोएडा को ‘स्मार्ट सिटी’ कहने पर तंज कस रहे हैं—खुले गड्ढे, नाले और असुरक्षित साइटें रोज मौत बांट रही हैं। युवराज जैसे युवाओं की बलि व्यर्थ न जाए, इसके लिए कड़े कदम उठाने की मांग तेज हो गई है। परिवार न्याय की उम्मीद में डटा है, लेकिन सवाल वही हैं—क्या अब बदलाव आएगा?

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